चलती गोलियों के बीच मेजर को बचाने पहुंच गए, उनको बचा लिया पर अपनी जान गंवा दी

वतन के अमन की खातिर अमन ने खुद की आहूति दे दी. अमन ठाकुर यानी शेर-ए-कश्मीर. जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक ऐसा डिप्टी एसपी, जिसे आतंकियों से लोहा लेने का जुनून था. इसी जुनून के चलते अमन पुलिस में शामिल हुए. पहले समाज कल्याण विभाग में नौकरी मिली. फिर सरकारी लेक्चरर बने. मगर अमन ठाकुर ने तो जैसे पुलिस में ही जाने की ठान ली थी. वे दो-दो सरकारी नौकरी छोड़ पुलिस में शामिल हुए. और फिर आतंकियों पर कहर बनकर टूट पड़े. दो साल से उनकी पोस्टिंग कश्मीर में थी. और करीब-करीब हर आतंक विरोधी अभियान में वे शामिल होते थे. वे जम्मू कश्मीर पुलिस के आतंकियों के खिलाफ बनाए गए स्पेशल टास्क फोर्स में थे. उन्होंने साउथ कश्मीर के आतंक प्रभावित इलाके कुलगाम में कई आतंकियों को ढेर किया.
24 फरवरी को भी वे एक ऐसे अभियान पर थे, इसमें उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर 3 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया. मुठभेड़ में अमन ठाकुर को भी गोलियां लगीं. आनन-फानन में उनको सेना के बेस अस्पताल ले जाया गया. पर इलाज से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया.
तीन भाइयों में सबसे छोटे थे
जम्मू कश्मीर पुलिस सेवा के 2011 बैच के अफसर अमन बेहद काबिल और बहादुर अफसर थे. अमन जम्मू के डोडा क्षेत्र के रहने वाले थे. पुलिस की शानदार सेवा के लिए बीते महीने ही उनको डीजीपी का कमेंडेशन मेडल और सर्टिफिकेट मिला था. बहादुरी और आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनके साहस के लिए उन्हें शेर-ए-कश्मीर वीरता पदक से सम्मानित किया गया था. शहीद डीएसपी अमन ठाकुर तीन भाइयों में से सबसे छोटे थे. उनके एक भाई शिक्षा में विभाग में लेक्चरर हैं. और एक भाई राज्य पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल हैं. वे भी इन दिनों कश्मीर घाटी में ही तैनात हैं.
अमन की शहादत की खबर के बाद से जम्मू में उनके घर में मातम फैला है. घर में पत्नी सरला, छह साल का बेटा आर्यन और उनके माता-पिता हैं. अमन पिछले 7 सालों से रेशमगढ़ इलाके में किराए पर रहते थे. उनके मिलनसार व्यवहार की वजह से पूरा इलाका गम में है. उनके मित्र उन्हें उनकी सादगी, साफगोई और पेशेवर अंदाज के लिए याद करते हैं. एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक वे अपने दृढ़ संकल्प और बहादुरी के लिए जाने जाते हैं. अपने मददगार स्वभाव और पेशेवराना रुख के कारण बेहद कम समय में ही उन्होंने इलाके के स्थानीय लोगों का प्यार, सम्मान और प्रशंसा हासिल की थी.
अमन ठाकुर ने बेटे से वादा किया था कि मार्च में एग्जाम खत्म होने के बाद वे उसे घुमाने ले जाएंगे. फाइल फोटो
…जो लौट के घर ना आए
अमन ठाकुर कोई एक हफ्ते पहले ही घर आए थे. उस वक्त ड्यूटी पर जाने से पहले छह साल के बेटे आर्यन से एक वादा करके गए थे. अमन ने बेटे से वादा किया था कि मार्च में एग्जाम खत्म होने के बाद वे उसे घुमाने ले जाएंगे. और जल्द लौटकर आएंगे. पर अमन लौटकर तो आए, लेकिन बेटे आर्यन की अब ये ख्वाहिश अधूरी ही रह गई. पापा अमन आए तो लेकिन तिरंगे में लिपटकर. 24 फरवरी को जब अमन ठाकुर की शहादत की खबर जम्मू पुलिस कंट्रोल रूम पहुंची, अफसरों को ये समझ में नहीं आ रहा था कि अमन के परिवार को उनकी शहादत की खबर कैसे दी जाए. बाद में एएसपी शिमा नबी की ये जिम्मा सौंपा गया.
अमन के कई रिश्तेदारों को सोशल मीडिया के जरिए भी उनकी शहादत की जानकारी हुई. फिर एक-एक करके लोग उनके घर में जुटने लगे. कुछ ही देर में आइजी जम्मू एमके सिन्हा, जम्मू कठुआ रेंज के डीआईजी विवेक गुप्ता, एसएसपी जम्मू तेजेंद्र सिंह के अलावा पुलिस के सभी वरिष्ठ अधिकारी अमन के घर पर पहुंच गए. इस मौके पर जम्मू कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि वे हमेशा जोश से लबरेज रहते थे. और सामने से अपनी टीम को लीड करते थे. दुख की इस घड़ी में हमारी संवेदनाएं अमन ठाकुर के परिवार के साथ हैं.
क्या हुआ 24 फरवरी को?
24 फरवरी, 2019 को दोपहर सूचना आई कि जैश-ए-मोहम्मद के कुछ आतंकी तूरीगाम इलाके में छिपे हैं. इस पर सेना के राष्ट्रीय रायफल्स, पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स और सीआरपीएफ ने एक जॉइंट ऑपरेशन शुरू किया. एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षाबलों ने तूरीगाम की घेराबंदी कर ली और घरों की तलाशी लेने लगे. इस पर स्थानीय लोगों ने आतंकियों के खिलाफ अभियान में बाधा डालने की कोशिश की. सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिेए आंसू गैस के गोले छोड़े. इसी बीच एक मकान में छिपे आतंकियों ने फायरिंग चालू कर दी. करीब तीन बजे शुरू हुई मुठभेड़ में सेना के मेजर सुशील सिंह ने घर के भीतर घुसने की कोशिश की. उनको गोली लग गई. उनके साथ बलदेव राम, सिपाही जसवीर सिंह और हवलदार सोमवीर भी जख्मी हो गए.
सुरक्षाकर्मियों ने आतंकियों की गोलियों का जवाब देते हुए घायल पड़े जवानों को वहां से हटाने का अभियान शुरू किया. सभी जवानों को हटा लिया गया, लेकिन मेजर सुशील सिंह जमीन पर आतंकियों की सीधी फायरिंग रेंज में थे. ये देख एसटीफ के डीएसपी अमन ठाकुर ने खुद मोर्चा संभाला. वे जैसे ही घायल मेजर को उठाने पहुंचे आतंकियों की गोली का शिकार हो गए. फिर भी वे मेजर को वहां से निकालने में कामयाब रहे. और जवाबी कार्रवाई करते हुए एक आतंकी को मार गिराया. घायल मेजर और डीएसपी को उसी समय श्रीनगर स्थित सेना के बेस अस्पताल लाया गया, जहां डीएसपी अमन ठाकुर और सैन्यकर्मी सोमवीर को मृत घोषित कर दिया गया. इस बीच, अन्य जवानों ने आतंकियों को मार गिराने के लिए अभियान जारी रखा और वहां छिपे दो आतंकियों को मार गिराया.

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